There is someone living up there – Hindi Ghost Story

नमस्कार – मेरा नाम चन्दर है। मै गाजियाबाद जिले के एक गाँव का वासी हूँ, और पिछले कुछ सालों से नौकरी की वजह से नॉएडा में रह रहा हूँ। यह कहानी उस वक़्त की है जब मैं करीबन सात साल का था। मेरे पिताजी सरकारी नौकर थे और उन्हें रहने के लिए एक सरकारी घर मिला था, जिसमे हम सब (मैं, माँ, पापा और मेरी छोटी बहन) रहते थे। कुछ ही महीनों के बाद पापा एक लम्बी बिमारी के कारण हमें छोड़ गए। अब घर की सारी जिम्मेदारी माँ पे थी।

कुछ ही दिनों में हम वह सरकारी घर छोड़ एक छोटे घर में रहने गए, जो की माँ ने किराए पे लिया था। यह घर गाँव से थोड़ा दूर था और मुख्य सड़क से थोड़ा अंदर था। यह घर असल में एक पुरानी हवेली का हिस्सा था, जो अब काफी टूट फुट गयी थी और रहने लायक सिर्फ चार कमरे बाकी थे – उसमे से दो कमरे निचली मंजिल पर थे (जिनमे से एक माँ ने किराए पे लिया था) और बाकी दो पहले मंजिल पे थे। हमारे कमरे के दो हिस्से किये गए थे – एक रसोई और दूसरे हिस्से में बिस्तर लगाए थे। हमारे बाजू वाले कमरे में मकान मालिक की बूढी माँ रहती थी। वह काफी दयालु औरत थी – माँ जब काम पे चली जाती थी तब मेरा और मेरी बहन का वह खूब ख़याल रखती थी।

ऊपर के दोनों कमरे बंद रखे गए थे – जब माँ ने पूछताछ की तब मकान मालिक ने झूठमूठ ही बता दिया की दोनों कमरो की काफी मरम्मत बाकी है, छत ठीक नहीं, वगैरा। माँ ने भी बात को ज्यादा छेड़ा नहीं।

लेकिन इस घर में पहले दिन से ही मेरे साथ अजीबोगरीब घटनाएँ होने लगी। मेरी बहन छोटी थी इसलिए माँ काफी बार उसे अपने साथ दफ्तर ले जाती थी, या फिर मेरी मौसी के घर छोड़ आती थी। इस वजह से स्कूल के बाद मैं घर पे अकेला ही रहता था। ऐसेही एक दोपहर मैं स्कूल से घर लौटा। माँ ने मेरी बहन (मीना) को मासी के घर पे छोड़ा था। मैंने खाना खाया और बिस्तर पर लेट पड़ा। मुझे नींद आ ही रही थी, जब मैंने कुछ अजीब आवाज सुनी। आवाज ऊपर के मकान से आ रही थी – मानो कोई पैर घसीटते हुए जमीन पर चल रहा हो। मैं चौकन्ना हो गया और ध्यान से सुनाने लगा। कुछ मिनिटों बाद आवाज बंद हो गयी।

मुझे लगा के यह मेरा वहम होगा, और यह सोचकर मैं वापस सोने की कोशिश करने लगा। लेकिन थोड़े ही समय में आवाज़ वापस शुरू हो गयी – और घसीटने के साथ साथ मुझे ऐसे लगा के कोई गहरी सास लेते लेते हाफ रहा है। मेरी नींद उड़ गयी और मैं झट से घर के बाहर दौड़ा – ऊपर के मकान को देखा तो हमेशा की तरह सब खिड़कियाँ बंद थी। अब मुझे डर लगने लगा और मैं बाजूवाले मकान का दरवाजा खटखटाने लगा। मकान मालिक की बूढी माँ ने दरवाजा खोला और बड़े प्यार से मुझे पूछा के मैं इतना डरा हुआ क्यों हूँ। मैंने हाफ्तेहाफ्ते उन्हें पूरी कहानी बता दी। मेरी कहानी सुनकर उनके चेहरे पर एक अजीबसा डर दिखाई दिया, लेकिन फिर उन्होंने हसकर मुझे बोला के मैंने कोई सपना देखा होगा।

उसके बाद कुछ दिन मुझे ऐसेही आवाजे सुनाई देती। मैंने कई बार माँ को बताने की कोशिश की, लेकिन वह काम से लौटकर इतना थकती थी के कुछ सुनाने की हालत में नहीं होती।

फिर एक रात की बात है। माँ और मीना गहरी नींद में थे, लेकिन मैं बिस्तर पर लेटा अभीभी बीते दिनों की घटनाओं के बारे में सोच रहा था। तभी मुझे और एक आवाज़ सुनाई दी – ऐसा लग रहा था की ऊपर के मकान में कोई दीवार पे खरोच रहा है। धीरे धीरे वह आवाज़ मेरे सामने वाली खिड़की के पास से आने लगी। मैं उठकर बैठा और मैंने सामने जो दृश्य देखा उससे मेरी सासें थम गयी।

हमारी खिड़की की सलाखों को पकड़के के उलटी टंगी आकृति मुझे घूर रही थी। उसके लम्बे बाल नीचे झूल रहे थे और उसकी सासे बहुत तेज थी। यह देखकर मेरे होश गुल हुए, और बेहोश गिरने से पहले मैं जोर से चीखा।

जब मुझे होश आया तो माँ मुझे अपने गॉड में लिए सहला रही थी। मकानमालिक की माँ बाजू में बैठी थी। इस हकीगत के बाद दो दिन तक मुझे तेज बुखार चढ़ा था और इस बुखार में (माँ बताती है) मैं बार बार सिर्फ एक ही बात बड़बड़ा रहा था – “ऊपर कोई रहता है”! थोड़ी ही दिनों में माँ को दूसरी नौकरी मिल गयी और हम एक दुसरे घर में रहने गए।

इस घटना को काफी साल बीत गए है। आज मैं नॉएडा में एक बड़े घर में माँ और मेरी बीवी के साथ रहता हूँ। मीना की भी शादी हुई है और वह अपने घर में खुशहाल है। लेकिन, जब भी इस घटना की याद आती है, आज भी मैं घबरा जाता हूँ।

लेखक – चन्दर सिंग (उत्तर प्रदेश, ग़ाज़ियाबादनॉएडा)

Translation

Hello everyone, my name is Chandar. I am native to a village in Ghaziabad, and have been working in Noida since the last couple of years. The story I am going to narrate took place when I was about seven years old. My father was a Government servant, and we (Mom, Dad, my younger sister Meena and me) used to live in a government quarter allotted to him. Shortly after, my dad passed away due to a prolonged illness.

Now, the entire responsibility of our house fell onto my mom’s shoulders. She opted for a daily wage job, and we moved out of the government quarter into a small house, which my mom rented. It wasn’t much of a house though – it was a part of an ancient haveli (mansion), which was now almost ruined save four rooms – two on the ground floor and two above them. Our room was located on the ground floor and this room was further partitioned into a small kitchen and a bedroom. In the adjacent room lived the house owner’s aged mother. She was a kind old lady and tended to me and Meena when our mom went off to work.

The two rooms above us were kept locked – when my mom tried asking more about them, the owner gave excuses like the rooms weren’t kept well, the roof was leaking, etc. Even my mom ignored this discussion.

However, I started experiencing spooky things in this place. Meena was very young, due to which mom took her to work with her, or dropped her at my aunt’s place daily. I used to come home from school in the afternoon and wait for both of them.

One such afternoon, I came home from school, had my lunch and was about to take a nap. I was almost asleep when suddenly – I heard noises coming from the room above, as if somebody was dragging their feet across the floor. I got alert and tried listening hard. However, the noises vanished. I assumed it was my imagination and tried sleeping again. However, after a couple of minutes, I could hear the voices again – and this time, along with the dragging, I could also hear a heavy breath – sort of a panting voice. This scared me and I ran out of my house.

I looked up and saw that the room above was all closed and sealed. Frightened, I knocked on the old lady’s door. She came out and asked me very lovingly as to why I was frightened. As she listened to my story, a dark fear spread across her face, but then, she suggested that I was definitely having a dream!

I heard those voices for quite a number of days. I even tried telling mom about it – but she was so exhausted after a day’s routine, she could never give proper attention to my story.

Then one night – I was lying on my bed. Ma and Meena were deep asleep. However, I was still thinking about the noises that I had been hearing since the last couple of days. I was about to sleep, when I started hearing those voices again. Only this time – it felt as though somebody was scratching the walls. Slowly, I could sense those sounds reaching out to the window in front of me. I got up and saw the scariest thing in front of my eyes –

There was an inverted womanly figure outside our window, clutching the window bars and looking right at me! Her hair was waving down and she was breathing very deeply. I was scared to death – and I started losing my conscious – the last thing I remember is yelling loudly.

When I woke up, I was resting in my mom’s lap. I looked besides and saw the owner’s mom sitting next to me. For the next two days, I ran a high fever, and kept mumbling (mom tells me), “There is someone living up there!”

It has been years since this incident. Today, I live in a Noida, in a big house with my mom and my wife. Meena is married and living happily with her husband.

However, even today when I think about the whole encounter, I start feeling restless.

A Personal Encounter by Chandar Singh (Uttar Pradesh, Ghaziabad | Noida)

Summary
Article Name
There is someone living up there - Hindi Ghost Story | IHT
Description
यह घर असल में एक पुरानी हवेली का हिस्सा था, जो अब काफी टूट फुट गयी थी और रहने लायक सिर्फ चार कमरे बाकी थे... Read this ghost story in Hindi or English
Author

You may also like...

Leave a Reply